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सोमवार, 19 जून 2017
शनिवार, 16 अप्रैल 2016
पेट के लिए फायदेमंद है दही
माना जाता है कि मनुष्य के भोजन में पिछले 4500 सालों से दही का प्रयोग होता आ रहा है। दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस की बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दही में एक ऐसा पदार्थ पाया जाता है जो रक्त में उपलब्ध कोलेस्ट्रोल को कम करता है, इसलिए यह हृदय रोग में लाभ पहुंचाता है। दही का समुचित मात्रा में सेवन प्रतिरोधी क्षमता का विकास करता है।
ये भी हैं फायदें
1- त्वचा को नर्म और साफ रखने के लिए दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गले व बाहों पर लगाने से त्वचा में चमक आती है।
2- दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा की सफाई हो जाती है। इस प्रयोग से मुंहासों में भी लाभ होता है।
3- दही में चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। फिर इसे उबटन की तरह प्रयोग करें। इससे त्वचा को विटामिन ‘सी’ और ‘ई’ मिलता है। इससे चमक बनी रहती है।
4- दही में काली मिट्टी मिलाकर बाल धोने से बाल मुलायम, चमकीले व घने हो जाते हैं।
5- दही का रोजाना सेवन सर्दी और सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाता है।
6- मुंह के छालों को कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
7-दही में बेसन घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद सिर धो लें। इससे बालों की चमक लौट आएगी।
सावधानियां
1. शाम के भोजन और रात्रि में दही का सेवन नहीं करें।2. विद्यार्थियों को परीक्षा के दिनों में दही का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। दही आलस्य लाता है।
3. खट्टा दही सेवन न करें। ताजे दही का प्रयोग करें।
4. सर्दी, खांसी, अस्थमा के रोगियों को भी दही से परहेज करना चाहिए।
5. त्वचा रोगों में दही का सेवन सावधानी पूर्वक डॉक्टर की सलाह लेकर करना चाहिए।
6. अर्श (पाईल्स ) के रोगियों को भी दही का सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016
अरबी के भजिये खाएं, जोड़ों का दर्द भगाए
अरबी को अलग-अलग जगह कई नामों से जाना जाता है। अरबी को कभी कच्चा नहीं खाना चाहिए। इसकी पत्तियों और कंदों को भलि-भांति उबालकर ही उपयोग में लाना चाहिए। इसकी पत्तियों को जलाकर उसकी राख को नारियल तेल में मिलाकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है। अरबी के पत्तों में बेसन लगाकर भजिए बनाकर खाने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। कोशिश होनी चाहिए कि अरबी की सब्जी बनाते समय कम तेल का प्रयोग करें। अरबी की सब्जी खाने के कई फायदे हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। अरबी खाने से गुर्दे, मांसपेशियां और शरीर की नसें सभी ठीक रहकर काम करती हैं।
अरबी खाने के फायदे
1. ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं से बचाव के लिए
अरबी में सोडियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा ये पोटैशियम और मैग्नीशियम के गुणों से भी भरपूर है, जिसके कारण यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। साथ ही ये तनाव दूर रखने में भी मददगार है।
2. कैंसर से बचाव के लिए
अरबी में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को विकसित होने से रोकते हैं।
3. मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद
अरबी में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं। अरबी खाने से इंसुलिन और ग्लूकोज की मात्रा का संतुलन बना रहता है।
4. वजन कम करने में सहायक
अरबी भूख को नियंत्रित करने का काम करती है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर्स मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाते हैं, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
5 . त्वचा की सेहत
अरबी की जड़ों में विटामिन ए और ई पाया जाता है। इसकी वजह से यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद ये सभी विटामिन शरीर की त्वचा को लंबे समय तक सेहतमंद और चमकदार बनाए रखते है।
बुधवार, 6 अप्रैल 2016
पाचन क्रिया में पान फायदेमंद
पूजा-अर्चना हो या फिर बरातियों का स्वागत करना हो सभी में पान के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। पान खाना पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद है। ये सैलिवरी ग्लैंड को सक्रिय करके लार बनाने का काम करता है, जोकि खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने का काम करता है। कब्ज की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी पान की पत्ती चबाना फायदेमंद है। गैस्ट्रिक अल्सर को ठीक करने में भी पान काफी फायदेमंद है। पान की पत्ती खाने में थोड़ी कसैली होती है, लेकिन इसे खाने वाले इसमें सुपारी, कत्था, चूना और दूसरी कई चीजें मिलाकर खाते हैं। आमतौर पर लोग इसे गलत आदत मानते हैं, लेकिन हर चीज की तरह इसके भी कुछ फायदे हैं। पान खाने वालों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पान खाने के बाद कूड़ेदान का ही इस्तेमाल करें न कि किसी दीवार और सड़क का।
पान खाने के यह भी हैं फायदे
1. मुंह के स्वास्थ्य के लिए
पान के पत्ते में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं। जिन लोगों के मुंह से दुर्गंध आ रही हो उनके लिए पान फायदेमंद होता है। पान खाने वालों के लार में एस्कॉर्बिक एसिड का स्तर भी सामान्य बना रहता है, जिससे मुंह संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।
2. मसूड़ों में सूजन या गांठ आ जाने पर
मसूड़े में गांठ या फिर सूजन हो जाने पर पान का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। पान में पाए जाने वाले तत्व इन उभारों को कम करने का काम करते हैं। इसके अलावा माथे पर पान के पत्ते का लेप करने से सिरदर्द दूर हो जाता है।
3. साधारण बीमारियों और चोट लगने पर
अगर आपको सर्दी है तो ऐसे में पान के पत्ते आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। इसे शहद के साथ मिलाकर खाने से फायदा होता है। साथ ही पान में मौजूद एनालजेसिक गुण सिर दर्द में भी आराम देता है। चोट लगने पर पान का सेवन घाव को भरने में मदद करता है।
4. थकावट दूर करता है
पान के पत्तों के रस में शहद मिलाकर पीने से थकावट और कमजोरी दूर होती है। साथ ही यदि आपको जुकाम है तो पान में लौंग डालकर खाएं फायदा मिलेगा।
5. आठ हफ्तों में कम करे मोटापा
पान के पत्ते को काली मिर्च के दानों के साथ खाएं तो आठ हफ्तों में मोटापा कम होगा। काली मिर्च शरीर से मूत्र और पसीने को निकालती है। इससे शरीर से अत्यधिक पानी और गंदगी निकल जाती है।
भूख बढ़ाता है जामुन
जामुन की प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। इसके खाने से भूख बढ़ती है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है। यह गर्मी के साथ ही बाजार में आने लगता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जामुन के सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी है। बस एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें। न ही कभी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करें। अधिक मात्रा में भी जामुन खाने से परहेज करें।
जामुन खाने के फायदें
1. मुंहासे होने पर जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लीजिए। इस पाउडर में रात को सोते समय गाय का दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए, इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धो लीजिए।
2. विटामिन सी की कमी को दूर करने के लिए जामुन खाना अच्छा रहता है। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि जामुन में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
4. जामुन का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाती है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर होती है।
5. जामुन में फ्लेवोनॉइड्स, फेनॉल्स, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है, जो सेहत के लिए लाभकारी होता है।
6. ग्लूकोज और फ्रक्टोज के रूप में मिलने वाली शुगर शरीर को हाईड्रेट करने के साथ ही कूल और रिफ्रेश करती है।
7. अगर आपको कमजोरी महसूस होती है या आप एनीमिया से पीड़ित हैं तो जामुन का सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
8. यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो काले नमक में भुना जीरा मिलाकर पीस लें। फिर इसके साथ जामुन का सेवन करें। एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी।
10. यदि आपका बच्चा बिस्तर गीला करता है तो जामुन के बीजों को पीसकर आधा-आधा चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ पिलाएं।
11. गले के रोगों में जामुन की छाल को बारीक पीसकर सत बना लें। इस सत को पानी में घोलकर 'माउथ वॉश' की तरह गरारा करें। इससे गला तो साफ होगा ही, सांस की दुर्गंध भी बंद हो जाएगी और मसूढ़ों की बीमारी भी दूर हो जाएगी।
12. विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए। काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बांधने से घाव ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।
शनिवार, 2 अप्रैल 2016
ठंडा पानी शरीर के लिए सिर्फ नुकसानदायक
20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान का पानी शरीर के लिए नुकसानदायक है। मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट यानी 37 डिग्री सेल्सियस होता है। ऐसे में अगर आप 20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान का पानी पीते हैं तो आपके शरीर में तापमान का एक बड़ा अंतर हो जाएगा। इस अंतर को कवर करने में आपके शरीर को एक अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ेगी। जबकि यह उर्जा भोजन को पचाने के लिए खर्च होनी थी, ऐसे में ठंडा पानी आपके पाचन को भी प्रभावित करता है। यही वजह है कि जब भी हम ठंडा पानी पीते हैं तो उसे उसे निगलने में थोड़ा समय लगता है, क्योंकि पहले पानी मुंह में ही रहता है जब उसका तापमान सामान्य हो जाता है, तभी गला उसे नीचे उतारता है और अधिक समय तक ठंडा पानी पीते रहने से टॉन्सिल्स की समस्या उत्पन्न होती है।
ठंडा पानी पीने से होने वाले ये तीन बड़े नुकसान
1. हृदय गति कम करता है
ठंडा पानी पीने से आपके हृदय की गति कम हो जाती है। अध्ययनों से पता चला है कि ठंडा पानी वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करता है। वेगस तंत्रिका 10 वीं कपाल तंत्रिका है तथा यह शरीर के स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शरीर के अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करती है। वेगस तंत्रिका हृदय की गति को कम करने में मध्यस्थता करती है तथा ठंडा पानी इस तंत्रिका को उत्तेजित करता है। इसके कारण हृदय की गति कम हो जाती है।
2. शरीर में पोषक तत्वों की कमी
ठंडा पानी आपके भोजन की पाचन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है, क्योंकि ठंडा पानी पीने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे पाचन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। जब पाचन ठीक से नहीं होगा तो भोजन के पोषक तत्व भी शरीर में नहीं लगेंगे।
3. कब्ज की समस्या
ठंडा पानी पीने से शरीर में बनने वाले पाचक रस का तापमान भी कम हो जाता है। इससे भोजन के पाचन में कठिनाई होती है और ठंडे पानी से पेट की बड़ी आंत भी सिकुड़ जाती है जो कब्ज का मुख्य कारण है। जिन लोगों को अक्सर कब्ज की समस्या होती है उन्हें ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए।
गुरुवार, 31 मार्च 2016
फूलों में छिपा है सेहत का खजाना
फूलों में छिपा है सेहत का खजाना
फूलों से भी सेहत बनाई जा सकती है। जी हां, फूल सिर्फ खुशबू देने के लिए नहीं होते, बल्कि इनमें कई प्रकार के पोषक तत्व भी मौजूद होते है। ये पोषक तत्व कई बीमारियों को शरीर से दूर रखते हैं। फूलों में फाइबर, कैल्शियम, विटामिन, प्रोटीन और मिनरल का भंडार होता है, जिनकी जरूरत शरीर को होती है। आइए हम आपको बताते है कि किस फूल में सेहत के कितने राज छिपे हैं।
गुड़हल
गुड़हल का फूल विटामिन सी, कैल्शियम, वसा, फाइबर, आयरन का बढ़िया स्रोत है। मुंह के छाले में गुड़हल के पते चबाने से लाभ होता है। इसके अलावा गुड़हल के फूल का प्रयोग कॉलेस्ट्रॉल, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और गले के संक्रमण जैसे रोगों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाओं में किया जाता है।
गुलाब
सुबह अगर खाली पेट गुलाबी गुलाब की दो पखुड़ियां खा ली जाएं तो दिन भर ताजगी बनी रहती है। क्योंकि गुलाब बेहद अच्छा ब्लड प्यूरिफायर है। अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रोंकाइटिस, डायरिया, कफ, फीवर, हाजमे की गड़बड़ी में गुलाब का सेवन बेहद उपयोगी होता है। आंखों की जलन और खुजली दूर करने के लिए गुलाब जल का प्रयोग किया जाता है।
कमल
कमल के फूल फोड़े-फुंसी को दूर करते हैं। इसकी पंखुड़ियों को खाने से मोटापा कम होता है, रक्त विकार दूर होते हैं और मन प्रसन्न रहता है। इसकी पंखुड़ियों को पीसकर चेहरे पर मलने से सुंदरता बढ़ती है। इन फूलों के पराग से मधुमक्खियां शहद बनाती हैं।
मोगरा
यह गर्मियों का एक खुशबूदार फूल है। इन फूलों को अपने पास रखने से पसीने की दुर्गंध नहीं आती है। इसकी कलियां चबाने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली परेशानी कम होती है। मोगरे के फूल मसलकर स्नान करने से त्वचा में प्राकृतिक ठंडक का एहसास होता है। जिससे दिन भर ताजगी रहती है।
गेंदा
- घरों में गेंदे का पौधा जरूर लगाना चाहिए, क्योंकि इसके फूलों को घाव भरने का सर्वश्रेष्ठ मरहम माना जाता है। गेंदे के फूलों को तुलसी के पतों के साथ पीस कर मलहम बनाया जाता है। चर्म रोग या शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ जाने पर इन फूलों को पीसकर पेस्ट बनाकर लगाने से फायदा होता है। गेंदे के रस से कुल्ला करने पर दांत दर्द और कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक गेंदे की महक से मच्छर दूर भागते हैं।
चमेली -
खुशबू से भरे ये फूल बेहद नाजुक होते हैं। चमेली के फूलों से बना तेल चर्म रोग, दंत रोग, घाव आदि पर गुणकारी है। चमेली के पत्ते चबाने से मुंह के छालों में तुरंत राहत मिलती है। ये त्वचा और बालों के लिए उपयोगी है, रात को पानी में भिगो दीजिए, सुबह पीस लीजिए व गुलाब जल मिला दीजिए। इसे बालों में लगाने से चमक व चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है।
बुधवार, 30 मार्च 2016
कच्चा पपीता खाएं, इम्यून सिस्टम रहेगा मजबूत
हमारे शरीर में जो भी बीमारियां होती है, उसका मुख्य कारण होता है शरीर का कमजोर इम्यून सिस्टम। इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का मतलब है कि शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का घटना। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उसको मिलने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर करती है। कच्चा पपीता और उसके बीज में बहुत सारा विटामिन ‘ए’, ‘सी’ और ‘ई’ होता है, जो कि शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। कच्चा पपीता सर्दी और जुखाम में भी फायदा करता है। यह शरीर में बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है। पपीते का रस अरूचि, अनिद्रा, सिर दर्द आदि रोगों को ठीक करता है। यह कब्ज से छुटकारा भी दिलाता है। पेप्सिन नामक तत्व पके हुए पपीते के बजाए कच्चे पपीते में होता है, इससे पेट की कब्ज दूर होती है। इसके अलावा और भी कई तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं।
जिंक युक्त खाद्य पदार्थ लें
जिंक ऐसा मिनरल है जो एंटीबॉडीज, टी-सेल्स व सफेद रक्त कणों में बढ़ोत्तरी कर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। एक शोध के अनुसार, जिंक की कमी होने पर शरीर बैक्टीरिया, वायरस व परजीवी द्वारा किए गए आक्रमणों से आपका बचाव नहीं कर पाता है। अमेरिकन नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के विशेषज्ञ डॉ. नोवेरा के अनुसार, जिंक उम्र के साथ होने वाले इम्यून सिस्टम की कमजोर होने की प्रक्रिया को धीमा करता है। योगर्ट, कद्दू के बीज में जिंक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है।
खूब पिएं पानी
प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन किडनी की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरस्त रखने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के लिए बहुत जरूरी होता है। इससे इम्यून सिस्टम में मजबूती आती है।
नींद पूरी लें
साल 2001 में पब्लिश स्लीप स्टडी के जर्नल सेमिनार्स के क्लीनिकल न्यूरोसाइकाइट्री के लेखकों के अनुसार आपके शरीर और मस्तिष्क के ठीक ढंग से काम करने के लिए 6-8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते तो इम्यून तंत्र कमजोर हो जाता है। इसलिए पूरी नींद लें।
पौष्टिक भोजन लें
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ भोजन बहुत जरूरी है। इम्युनिटी को बेहतर बनाने में संपूर्ण और संतुलित आहार लें। गहरे रंग की सब्जियों को इस्तेमाल ज्यादा करें।
तनाव कम लें
छोटी-छोटी बात पर तनाव न लें। तनाव अप्रत्यक्ष रूप से इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है। तनाव से पाचन तंत्र प्रभावित होने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है।
मोटापा कम करें
यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना चैपल हिल स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में हुए शोध के अनुसार, मोटापा प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य के बीच बाधा उत्पन्न करता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए अपनी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले अपने मोटापे को कम करें।
शनिवार, 26 मार्च 2016
युवाओं में मोटापा बढ़ना दिल के लिए खतरनाक
यदि आपकी उम्र 20 से 35 के बीच है और आप का वजन
बढ़ रहा है तो सावधान हो जाइए। हाल ही में दिल की बीमारी पर की गई एक रिसर्च में पाया
गया है कि अब ऐसे मोटे युवा दिल की बीमारी का शिकार हो रहे हैं, जो धूम्रपान करते हैं।
साथ ही डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर से ग्रस्त हैं। मुख्य शोधकर्ता एवं क्लीवलैंड क्लीनिक
के समीर कपाड़िया के मुताबिक दिल की बीमारी से बचने के लिए हमें अपनी दिनचर्या में
सुधार करना होगा। पिछले दो दशकों में भारत में बैड लाइफस्टाइल, तनाव, एक्सरसाइज ना
करने और बैड फूड हैबिट्स की वजह से लोगों को दिल की गंभीर बीमारियां होने लगी है।
ये लक्षण बताएंगे दिल की बीमारी है या नहीं
पेट में दर्द- दिल संबंधी कोई भी गंभीर समस्या
होने से पहले कुछ लोगों को मितली आना, हृदय में जलन, पेट में दर्द होना या फिर पाचन
संबंधी दिक्कतें आने लगती हैं।
हाथ में दर्द होना- कई बार दिल के रोगी को छाती
और बाएं कंधे में दर्द की शिकायत होने लगती है। ये दर्द धीरे-धीरे हाथों की तरफ नीचे
की ओर जाने लगता हैं।
कई दिनों तक कफ होना- यदि आपको काफी दिनों से
खांसी-जुकाम हो रहा है और थूक सफेद या गुलाबी रंग का हो रहा है तो ये हार्ट फेल का
एक लक्षण है।
पसीना आना- सामान्य से अधिक पसीना आना खासतौर
पर तब जब आप कोई शारीरिक क्रिया नहीं कर रहे तो ये आपके लिए एक चेतावनी हो सकती है।
पैरों में सूजन- पैरों में, तलवों में सूजन आने
का मतलब ये भी हो सकता है कि आपके हार्ट में ब्लड का सरकुलेशन ठीक से नहीं हो रहा।
इनका इस्तेमाल करें तो दूर रहेगी दिल की बीमारी
खाने में सरसों के तेल का नियमित इस्तेमाल करें।
कच्चा लहसुन रोज सुबह खाली पेट छील कर खाएं।
सेब का जूस और आंवले का मुरब्बा खाएं।
एक चम्मच शहद प्रतिदिन लें, दिल को मजबूती मिलेगी।
रोज 50 ग्राम कच्चा ग्वारपाठा खाली पेट खाने
से भी कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है।
लौकी उबालकर उसमें धनिया, जीरा व हल्दी मिलाकर
खाएं।
अनार के रस में मिश्री मिलाकर हर रोज सुबह-शाम
पीने से दिल मजबूत होता है।
बादाम खाने से दिल सेहतमंद रहता है क्योंकि इसमें
विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
गुरुवार, 24 मार्च 2016
डायबिटीज है तो पिएं खरबूजे का रस
यदि आपको डायबिटीज है तो खरबूजे का रस पिएं आपको लाभ मिलेगा। यह ब्लड में शुगर लेवल को निंयत्रित करता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए खरबूजा एक औषधि की तरह काम करता है। इसके अलावा खरबूजे में प्रोटिन, कैल्शियम, मैग्नेशियम, पौटेशियम, क्लोरिन, सोडियम व सल्फर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यदि आप पूरी गर्मी नियम से रोज एक खरबूजा खाएंगे तो आप में मैकुलर डीजेनेरेशन का खतरा 36 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। मैकुलर डीजेनेरेशन ढलती उम्र के साथ होने वाली समस्या है, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है। खरबूजा उच्च बीटा-कैरोटेन उपलब्ध कराता है, जोकि मैकुलर डीजेनेरेशन को खत्म करने के लिए जरूरी है।
खरबूजा खाने के दस लाभ
- नियमित रूप से खरबूजे का सेवन करने वालों की किडनी स्वस्थ बनी रहती है। यह एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में विटामिन का अच्छा स्रोत है।
- खरबूजा लंग कैंसर से हमारे शरीर की रक्षा करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और बिटा- कैरोटेन मिलकर कैंसर रोकने में सहायक हैं।
- इसमें मौजूद पानी की ज्यादा मात्रा शरीर में पानी की कमी की भरपाई करता है। इसी वजह से हमारा शरीर गर्मियों में पसीने के रूप में शरीर से निकले पानी के भरपाई तुरंत कर लेता है।
- वजन कम करने के लिए भी खरबूजा बहुत अनुकूल फल है, क्योंकि इसमें काफी मात्रा कैलोरी या शुगर मौजूद होती है। जोकि वजन कम करने के लिए जरूरी है।
- इसके गूदे में मौजूद नारंगी रंग के रेशे या फाइबर काफी मुलायम होते हैं, जिन्हें कब्जियत की शिकायत रहती है, वे खरबूजा खाएं, तो उन्हें फायदा होगा।
- डायबिटीज के रोगियों के लिए भी खरबूजा एक औषधि की तरह काम करता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को खरबूजे का जूस पीना चाहिए।
- खरबूजा विटामिन बीटा-कारोटीन के रूप में विटामिन ए उपलब्ध कराता है, जो आंखों के लिए विशेष लाभप्रद होता है।
- पुरानी खाज में खरबूजे का रस लाभदायक है। अगर आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो त्वचा में रुखापन नहीं आएगा।
- खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो रक्त कोशिओं को जमने से रोकता है। रक्त कोशिकाओं के जमने से ही दिल की बीमारी होती है।
- खरबूजा में विटामिन बी पाया जाता है। विटामिन बी शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है।
- अगर खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।
- आप अक्सर तनाव में रहते हैं तो गर्मियों में खरबूजा खाना न भूलें। क्योंकि खरबूजे में भरपूर मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है।
- खरबूजा लंग कैंसर से हमारे शरीर की रक्षा करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और बिटा- कैरोटेन मिलकर कैंसर रोकने में सहायक हैं।
- इसमें मौजूद पानी की ज्यादा मात्रा शरीर में पानी की कमी की भरपाई करता है। इसी वजह से हमारा शरीर गर्मियों में पसीने के रूप में शरीर से निकले पानी के भरपाई तुरंत कर लेता है।
- वजन कम करने के लिए भी खरबूजा बहुत अनुकूल फल है, क्योंकि इसमें काफी मात्रा कैलोरी या शुगर मौजूद होती है। जोकि वजन कम करने के लिए जरूरी है।
- इसके गूदे में मौजूद नारंगी रंग के रेशे या फाइबर काफी मुलायम होते हैं, जिन्हें कब्जियत की शिकायत रहती है, वे खरबूजा खाएं, तो उन्हें फायदा होगा।
- डायबिटीज के रोगियों के लिए भी खरबूजा एक औषधि की तरह काम करता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को खरबूजे का जूस पीना चाहिए।
- खरबूजा विटामिन बीटा-कारोटीन के रूप में विटामिन ए उपलब्ध कराता है, जो आंखों के लिए विशेष लाभप्रद होता है।
- पुरानी खाज में खरबूजे का रस लाभदायक है। अगर आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो त्वचा में रुखापन नहीं आएगा।
- खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो रक्त कोशिओं को जमने से रोकता है। रक्त कोशिकाओं के जमने से ही दिल की बीमारी होती है।
- खरबूजा में विटामिन बी पाया जाता है। विटामिन बी शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है।
- अगर खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।
- आप अक्सर तनाव में रहते हैं तो गर्मियों में खरबूजा खाना न भूलें। क्योंकि खरबूजे में भरपूर मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है।
गुरुवार, 31 दिसंबर 2015
बच्चों को सुधार का मौका दिए बिना कठोर सजा कितनी सही
बच्चों को सुधार का मौका दिए बिना कठोर सजा कितनी सही
राज्यसभा से पास होने के बाद जुवेनाइल जस्टिस (केयर ऐंड प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन) बिल अब कानून में परिवर्तित हो जाएगा। नए कानून के अंतर्गत अब 16 से 18 साल का कोई नाबलिग गंभीर अपराध (हत्या और रेप जैसे जघन्य अपराध) करेगा तो उसके खिलाफ व्यस्कों की तरह ही केस चलेगा। हालांकि इसका फैसला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड करेगा। इसके लिए नाबालिग़ को अदालत में पेश करने के एक महीने के अंदर 'जुवेनाइल जस्टीस बोर्ड' इसकी जांच कर यह तय करेगा कि उसे 'बच्चा' माना जाए या 'वयस्क'। वयस्क माने जाने पर किशोर को मुक़दमे के दौरान भी सामान्य जेल में रखा जाएगा।
राज्यसभा से पास होने के बाद जुवेनाइल जस्टिस (केयर ऐंड प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन) बिल अब कानून में परिवर्तित हो जाएगा। नए कानून के अंतर्गत अब 16 से 18 साल का कोई नाबलिग गंभीर अपराध (हत्या और रेप जैसे जघन्य अपराध) करेगा तो उसके खिलाफ व्यस्कों की तरह ही केस चलेगा। हालांकि इसका फैसला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड करेगा। इसके लिए नाबालिग़ को अदालत में पेश करने के एक महीने के अंदर 'जुवेनाइल जस्टीस बोर्ड' इसकी जांच कर यह तय करेगा कि उसे 'बच्चा' माना जाए या 'वयस्क'। वयस्क माने जाने पर किशोर को मुक़दमे के दौरान भी सामान्य जेल में रखा जाएगा।
जुवेनाइल जस्टिस कानून में जघन्य अपराध करने वाले की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल कर दी गई है, लेकिन इस पर आमराय अभी भी बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि निर्भया कांड जैसी घटनाओं को देखते हुए उम्र घटाना जरूरी था, जबकि दूसरे लोगों का मानना है कि किसी एक घटना के आधार पर कानून बदलना जल्दबाजी है।
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में चाइल्ड राइट्स के लिए काम करने वाली एहसास संस्था की शचि सिंह का कहना है कि इस कानून से चाइल्ड राइट्स के लिए काम करने वाले कोई भी एक्टिविस्ट खुश नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अपराध में बच्चों का प्रयोग किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में तो अधिकांश केस फर्जी निकलते हैं। ऐसे में बच्चों की पूरी जिंदगी खराब हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘हम लोग बच्चों के साथ काम करते हैं, इसलिए हम इसके प्रभाव को समझ सकते हैं। महिला एवं बच्चों के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था आली की रेनू मिश्रा का मानना है कि नाबालिग के रिफॉर्म पर बात होनी चाहिए, लेकिन यहां पूरा कानून बदल दिया गया। जब यह कानून बना था तो पूरी दुनिया में रिसर्च के बाद इसे बनाया गया था। अब जो यह बिल पास किया गया उसमें न किसी विशेषज्ञ से राय ली गई और न ही इसकी बारीकियों को समझा गया है। बल्कि गुपचुप तरीके से इसे पास कर दिया गया है। रेनू कहती है कि इस संशोधन प्रस्ताव का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध करने के बावजूद इसे एक संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। इस समिति ने 16-18 साल की उम्र के नाबालिग़ों पर आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने का विरोध किया, लेकिन कैबिनेट और लोकसभा ने नए बिल को स्वीकृति दे दी।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अरविंद जैन ने भी बीबीसी को दिए अपने इंटरव्यू में कहा है कि बच्चों के प्रति जो राष्ट्र और समाज की जिम्मेदारी है उसे सिर्फ एक मामले पर जनभावनाओं या मीडिया के दबाव में नहीं बदला जा सकता। उन्होंने यहां तक कहा है कि वाजपेयी सरकार में मंत्री रहीं मेनका गांधी ने ही इस उम्र को 16 से बढ़ाकर 18 साल करवाया था। और आज मेनका गांधी ने ही इस उम्र को कम करने का प्रस्ताव दिया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2014-15 में जितने अपराध हुए हैं उसमें से जुवेनाइल से जुड़े अपराधों का हिस्सा 1.2 प्रतिशत है। बड़ी बात यह है कि यह प्रतिशत पिछले कुछ सालों से नियत है। जबकि भारत में युवाओं और जुवेनाइल की संख्या अन्य देशों की तुलना में ज्यादा है। इसके बावजूद मीडिया में कहा जाता है कि जुवेनाइल से जुड़े जघन्य अपराध बढ़ रहे हैं। ये सरासर गलत है। ऐसी गलत बातों को सामने रखकर नाबलिग की उम्र 18 से घटाकर 16 किया जाना सरासर गलत है। इन्हें जेल में खतरनाक अपराधियों के साथ रखेंगे तो जब ये सुधरने की बजाय और ज्यादा अपराधी होकर बाहर निकलेंगे।
लखनऊ यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति और महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था सांझी की रूपरेखा वर्मा कहती हैं कि बाल सुधार गृह में जो काम करने चाहिए, उसे ना करके नाबालिग अपराधी को बालिग की तरह फांसी पर लटका देना देश हित में नहीं है। हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि बच्चों को सुधारने के लिए जो कानून और नीतियां बनाई गई हैं उसका सही ढंग से क्रियान्वयन कराना, लेकिन हम अपनी इस जिम्मेदारी से बचने के लिए उन्हें सजा का डर दिखा रहे हैं।
दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग पूरे देश में उठने लगी। हाईकोर्ट का फैसला भी लोगों के पक्ष में आया और चारों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन आरोपियों के बचाव पक्ष के वकील एपी सिंह ने चार में से एक आरोपी जो कि अपराध करने के समय 17 साल का था उसे नाबलिग बताकर उसका केस जुवेनाइल एक्ट से चलाने की दलील दी। परिणाम स्वरूप एक आरोपी को जुवेनाइल एक्ट के तहत महज तीन साल की सजा हुई। इस दौरान उसको रिफॉर्म सेंटर में रखा गया। जिसे 20 दिसंबर 2015 को रिहा कर दिया गया। आरोपी की रिहाई से नाराज पीड़ित के माता पिता ने इसे न्यायसंगत न मानते हुए एक्ट में सुधार की मांग की। परिणामस्वरूप पूरे देश में उनके पक्ष में आंदोलन खड़ा हो गया। लोगों का आक्रोश इस कदर बढा कि बिल में संशोधन की जरूरत महसूस होने लगी। इसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने जुवेनाइल जस्टिस बिल 2014 को लोकसभा में 12 अगस्त 2014 को लोकसभा में रखा। लंबी बहस और रिसर्च के बाद लोकसभा ने 7 मई 2015 को इस बिल को पास कर दिया। इसके बाद बिल को राज्यसभा में पेश किया गया जहां 22 दिसंबर 2015 को बिल को पास कर दिया गया।
कहां चले मुकदमा?
संशोधित कानून - नाबालिग को अदालत में पेश करने के एक महीने के अंदर 'जुवेनाइल जस्टीस बोर्ड' ये जांच करे कि उसे 'बच्चा' माना जाए या 'वयस्क'। वयस्क माने जाने पर किशोर को मुकदमे के दौरान भी सामान्य जेल में रखा जाए। हालांकि चाइल्ड राइट पर काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि फैसले के लिए एक महीने का समय बहुत कम है। पुलिस चार्जशीट में या अदालत के फैसले में दोष साबित हुए बगैर, किशोर को वयस्कों की जेल में रखना गलत होगा। इन लोगों का कहना है कि दुनियाभर में किए अध्ययन के मुताबिक किशोरों को कड़ी सजा देने से उनकी अपराध करने की दर में कोई कमी नहीं आती। बल्कि सुधार गृहों में बेहतर सुविधाओं से लंबे दौर में बदलाव लाया जा सकता है।
कौन सा बच्चा माना जाएगा 'वयस्क'?
भारत समेत दुनियाभर के करीब 190 देशों ने ‘यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत कानूनन किसी बच्चे को 'वयस्क' मानने के लिए उम्र सीमा को 18 साल रखने की सलाह दी गई है। ऐसे में 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त का सामान्य अदालत की जगह 'जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड' में मुकदमा चलता है। हालांकि यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स’ के बावजूद देशों को उनके हिसाब से कानून में संशोधन करने की छूट दी गई है। इसके चलते ही दुनिया के अलग-अलग देशों में इसके लिए अलग-अलग कानून हैं।
कौन सा बच्चा माना जाएगा 'वयस्क'?
भारत समेत दुनियाभर के करीब 190 देशों ने ‘यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत कानूनन किसी बच्चे को 'वयस्क' मानने के लिए उम्र सीमा को 18 साल रखने की सलाह दी गई है। ऐसे में 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त का सामान्य अदालत की जगह 'जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड' में मुकदमा चलता है। हालांकि यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स’ के बावजूद देशों को उनके हिसाब से कानून में संशोधन करने की छूट दी गई है। इसके चलते ही दुनिया के अलग-अलग देशों में इसके लिए अलग-अलग कानून हैं।
जहां अपराधी बच्चों को दी जाती है उम्रकैद
वैसे तो भारत समेत दुनियाभर के 190 देशों ने ‘यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें उम्र सीमा को 18 साल रखने की सलाह दी गई है। पर हर देश इसमें अलग नियम बनाने को स्वतंत्र है।
बिट्रेन
दस साल से कम उम्र में किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तारी नहीं है, लेकिन कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। 10-17 साल कीउम्र के बच्चों पर मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट में, और दोषी पाए जाने पर विशेष सेंटर्स में भेजा जा सकता है। 18 साल की उम्र के किशोर को25 साल की उम्र तक जेल के बजाय विशेष सेंटर में भेजा जा सकता है। 10 साल की उम्र के बाद दी गई अधिकतम सजा उम्रकैद हो सकतीहै।
अमेरिका :
यहां हर राज्य ने अपने हिसाब से बच्चों पर मुकदमा चलाने की उम्र तय की है और ये अलग-अलग राज्य में न्यूनतम 6साल से लेकर 12 साल तक है। इसी तरह हर राज्य में बच्चों पर मुकदमा चलाए जाने की अधिकतम उम्र 16 से लेकर 19 साल तक है। इस उम्र तक मुकदमा जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में चलाकर सज़ा सुधार गृह भेजने जैसी हो सकती है। जघन्य अपराधों में नाबालिग काकेस जुवेनाइल कोर्ट से वयस्कों की अदालत में भेजने का प्रावधान है। जहां उसे बालिग समझते हुए मुकदमा चलाया जा सकता है। कुछराज्यों में 10 साल के बच्चे को भी अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है।
पाकिस्तान
सात साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। पर 1996 के एक अध्यादेश के ज़रिएरेप, अवैध संबंध बनाने, शराब पीने, ड्रग्स का सेवन करने, चोरी और किसी को बदनाम करने जैसे अपराध में अब हर उम्र के व्यक्ति कोअपराधी माना जा सकता है। यहां किसी जुवेनाइल कोर्ट की स्थापना नहीं की गई है। हालांकि कुछ मौजूदा अदालतों को यह दर्जा दे दियागया है। किशोरो की चार जेलें हैं, लेकिन अक्सर किशोरों को वयस्कों की जेल में ही रखा जाता है।
बिट्रेन
दस साल से कम उम्र में किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तारी नहीं है, लेकिन कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। 10-17 साल कीउम्र के बच्चों पर मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट में, और दोषी पाए जाने पर विशेष सेंटर्स में भेजा जा सकता है। 18 साल की उम्र के किशोर को25 साल की उम्र तक जेल के बजाय विशेष सेंटर में भेजा जा सकता है। 10 साल की उम्र के बाद दी गई अधिकतम सजा उम्रकैद हो सकतीहै।अमेरिका :
यहां हर राज्य ने अपने हिसाब से बच्चों पर मुकदमा चलाने की उम्र तय की है और ये अलग-अलग राज्य में न्यूनतम 6साल से लेकर 12 साल तक है। इसी तरह हर राज्य में बच्चों पर मुकदमा चलाए जाने की अधिकतम उम्र 16 से लेकर 19 साल तक है। इस उम्र तक मुकदमा जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में चलाकर सज़ा सुधार गृह भेजने जैसी हो सकती है। जघन्य अपराधों में नाबालिग काकेस जुवेनाइल कोर्ट से वयस्कों की अदालत में भेजने का प्रावधान है। जहां उसे बालिग समझते हुए मुकदमा चलाया जा सकता है। कुछराज्यों में 10 साल के बच्चे को भी अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है।
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