रविवार, 31 जुलाई 2022

नया घर बनवा रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें

आजकल लोग नए-नए तरीके से ऑर्किटेक्ट और इंजीनियर की मदद से अपने सपनों का आशियाना बनवाते हैं। इसमें लाखों रुपये भी खर्च कर देते हैं, लेकिन एक जरूरी स्टेप, जो भविष्य में पूरे मकान और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा उसपर ध्यान नहीं देते हैं। जिसके कारण लोगों का हजारों रुपये का नुकसान पलभर में हो जाता है और तो और कई बार तो वहां रहने वाले लोगों की जान पर बन आता है। जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं, ग्राउंड अर्थिंग की।  ग्राउंड अर्थिंग क्या है, हमें इसे क्यों करवाना चाहिए, इसको न करवाने से क्या नुकसान हो सकता है। और इसको करवाने से क्या फायदा हो सकता है। इन सभी मुद्दों पर आज हम चर्चा करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं। 



ग्रउंड अर्थ को समझने से पहले हमें फेज और न्यूट्रल के बारे में समझना होगा। कहीं पर भी बिजली देनी होती है तो हमेशा दो वायर दिए जाते हैं। इसमें एक फेज होता है और दूसरा न्यूट्रल। फेज वायर से करंट आता है और न्यूट्रल से वापस जाता है। अगर न्यूट्रल नहीं होगा तो सप्लाई रुक जाएगी, यानी करंट रुक गया। करंट जारी रहे इसलिए दोनों वायर लगाना जरूरी होता है। 


(ग्राउंड अर्थ के बारे में बताने से पहले मैं आपको थोड़ा से करंट के बारे में बता दूं। करंट यानी इलेक्ट्रॉन का फ्लो, जब इलेक्ट्रॉन तेजी से चलते हैं तो समझा जाता है कि वायर में करंट आ रहा है। करंट सप्लाई होता रहे इसके लिए जरूरी है कि इलेक्ट्रॉन के आने और जाने की व्यवस्था हो। यानी एक वायर से इलेक्ट्रॉन आएं और दूसरे से चले जाएं। ) 

अब बात करते हैं ग्राउंड अर्थिंग की। ग्राउंड आर्थिंग का कार्य लोगों को करंट लगने से बचाना होता है। दरअसल फेस से आने वाला करंट न्यूट्रल से वापस जाता है तो कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन अगर फेस से आया करंट न्यूट्रल में जाने से पहले आपके डिवाइस के किसी भी खुले हिस्से से छू जाता है तो संबंधित डिवाइस में करंट आ जाता है। इस अनचाहे करंट से बचने के लिए हम ग्राउंड अर्थ का इस्तेमाल करते हैं। इसको लगाने से घर में प्रयोग होने वाले बिजली के उपकरण आपको कभी करंट नहीं मारेंगे।  

ये कैसे काम करता है

ग्राउंड अर्थ फेज से लीक करंट को पकड़कर उसे वायर के माध्यम से ग्राउंड में उतार देता है। इससे करंट लगने की संभावना खत्म हो जाती है। इसके अलावा यदि अचानक वोल्टेज तेज हो जाता है तो भी यह अतिरिक्त करंट को वायर के माध्यम से ग्राउंड में पहुंचा देता है और आपके घर के कीमती उपकरण फुंकने से बच जाते हैं। बिजली के बोर्ड में लगने वाले हर सॉकेट में ग्राउंड अर्थ के लिए प्रावधान किया गया है। 

मेरे हाथ ये जो तीन प्लग वाला पिन है। इसमें दो छोटे पिन फेज और न्यूट्रल के हैं और ये जो तीसरा मोटा पिन है यह है अर्थ का। इसे हमेशा ज्यादा बड़ा बनाया जाता है, ताकि जब भी आप बोर्ड में प्लक लगाएं तो उसमें प्रवाहित लीकेज करंट को यह पहले पकड़कर ग्राउंड में पहुंचा दें और आपको करंट के झटके से बचा दें। 

कैसे होती है ग्राउंड अर्थिंग


ग्राउंड अर्थिंग जैसा की नाम है ग्राउंड में होती है। इसको बनाने के लिए आपको मकान के किसी हिस्से में करीब सात से आठ फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें नमक और कोयला की परत बिछा देनी चाहिए। इसके बाद एक तांबे की अर्थ प्लेट लेकर उसमें कॉपर वायर बांधकर उसे उस परत पर रखना चाहिए। इसके बाद तीन से चार बाद नमक और कोयले की परत को बिछा देना चाहिए। एक हिसाब से दस किलो नमक और दस से 12 किलो कोयला लगेगा। इसके बाद इस कॉपर वायर को एक प्लास्टिक पाइप से कवर कर ऊपर निकाल लेना चाहिए। ताकि जरूरत पर आप उस पाइप के जरिये कॉपर प्लेट तक पानी डाल सके। इसके बाद गड्ढे में पानी भरकर उसे पाट देना चाहिए। इस वायर को बोर्ड में जोड़कर पूरे घर में ग्राउंड अर्थ को दौड़ा दिया जाता है।

शनिवार, 30 जुलाई 2022

यूपी में अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री अब सिर्फ 6000 रुपये में


अब सिर्फ छह हजार रुपये में मकान की रजिस्ट्री होगी। जी हां उत्तरप्रदेश सरकार ने यह व्यवस्था कर दी है। यह नई व्यवस्था यूपी में 18 जून से शुरू की गई। फिलहाल यह छूट अगले छह महीने तक दी जा रही है। हालांकि यह छूट सिर्फ उन रजिस्ट्रियों में ही मिलेगी, जो रजिस्ट्रियां खून के रिश्ते में की जाएंगी। खून के रिश्ते में आने वालों में माता, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, बहू, दामाद, सगा भाई, सगी बहन, पुत्र व पुत्री का बेटा-बेटी आदि। तो अगर आप भी इस कैटिगिरी में आते हैं तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर है। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से

दोस्तों,

अगर आप यूपी से हैं और अपने परिवार के किसी भी सदस्य के नाम अपनी कोई प्रॉपर्टी करने के बारे में सोच रहे हैं तो अगले छह महीने तक बहुत ही सुनहरा अवसर है। दरअसल उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने बीती 18 जून को कैबिनेट की बैठक में एक प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। इसके तहत ब्लड रिलेश्न में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने पर अब सिर्फ छह हजार रुपये ही देने होंगे। इसमें पांच हजार रुपये स्टांप ड्यूटी और एक हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस के होंगे। भले ही प्रॉपर्टी कितनी ही महंगी क्यों न हो।

जबकि इससे पहले ऐसे मामलों में प्रॉपर्टी की डीएम सर्किल् रेट के हिसाब से कीमत तय करते हुए, उस कीमत पर आठ प्रतिशत स्टैंप ड्यूटी लेने का नियम था। इस नए नियम की शर्त बस एक ही है कि रजिस्ट्री ब्लड रिलेशन में हो और उसे संबंधित को दान दिया जाए। यानी की गिफ्ट डीड। गिफ्ट डीड वो डीड होती है, जिसके तहत परिवार के बड़े अपने बच्चों अथवा छोटे भाई बहन को अपनी प्रॉपर्टी बिना किसी कीमत के दान में देते हैं।

आमतौर पर परिवार के मुखिया, पारिवारिक सदस्यों के पक्ष में वसीयत कर देते हैं। क्योंकि रजिस्ट्री करवाके किसी को संपत्ति सौंपना काफी खर्च भरा होता है। मुखिया की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य प्रॉपर्टी को वसीयत के हिसाब से बांटकर अपना-अपना हिस्सा कब्जे में ले लेते हैं, लेकिन उसकी रजिस्ट्री नहीं करवाते हैं।

इससे वो लोग उस प्रॉपर्टी में मालिक तो हो जाते हैं, लेकिन उस प्रॉपर्टी पर लोन आदि नहीं मिलता है। कई बार तो मामला पुराना होने पर प्रॉपर्टी में परिवार के कई अन्य लोग दावेदारी ठोंक देते हैं। इस तरह के मामलों से पारिवारी कोर्ट में हजारों केस पेंडिंग है। बेवजह की मुकदमे बाजी से बचने के लिए ही योगी सरकार ने यह नई व्यवस्था दी है।



यूपी में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्रमुख सचिव वीना कुमारी ने इसके आदेश जारी कर दिए। इस योजना को अभी पायलट प्रोजेक्ट के तहत छह माह के लिए शुरू किया गया है। क्योंकि इससे सरकार को साल में करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसलिए इसे ट्रॉयल के रूप में शुरू किया गया है। आगे चलकर इसे स्थायी किया जाएगा।

गिफ्ट डीड के दायरे में आने वाले पारिवारिक सदस्यों में पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, बहू, दामाद, सगा भाई, सगी बहन, पुत्र व पुत्री का बेटा-बेटी आएंगे। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने इसकी अधिसूचना पिछले 18 जून को जारी कर दी है। अभी ऐसे मामलों में संपत्ति के विक्रय विलेख (सेल डीड) की रजिस्ट्री के तहत संपत्ति के मूल्य का आठ प्रतिशत तक स्टांप व निबंधन शुल्क देना होता है।


हालांकि छूट की यह सुविधा महाराष्ट्र, कर्नाटक व मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में पहले से ही थी। अब तक उत्तर प्रदेश में यह छूट नहीं दी जा रही थी।

भारतीय स्टांप अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश सरकार को ऐसी छूट देने का अधिकार है।





शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

प्लॉट खरीदना है, लेकिन डर लगता है कि कहीं मेरे साथ कोई फ्रॉड न हो जाए....

 प्लॉट खरीदना है, लेकिन डर लगता है कि कहीं मेरे साथ कोई फ्रॉड न हो जाए। प्लॉट कैसे खरीदें, किन बातों को ध्यान रखें ताकि धोखाधड़ी से बचे रहें। प्राधिकरण, आवास विकास अथवा सोसाइटी में किसका प्लॉट लिया जाए। इन सभी बातों पर आज हम बात करेंगे। 

इस विडियो को देखने के बाद आप अपनी जरूरत के अनुसार प्लॉट खरीद पाएंगे। तो चलिए शुरू करते हैं। 


दोस्तों हर किसी को अपना आशियाना बनाने के लिए भूखंड खरीदना होता है। या फिर बना बनाया मकान। अगर बजट कम हो तो भूखंड खरीदकर बनवाना सस्ता सौदा कहा जाता है। वैसे तो हर गली मुहल्ले में प्रॉपर्टी डीलर मिल जाएंगे, जो आपको भूखंड अथवा मकान खरीदने में मदद करेंगे, लेकिन इसमें काफी सावधनियां बरतनी जरूरी होती है। क्योंकि यह डीलर अपने कमीशन के लिए हर पैंतरा अपनाते हैं, कई बार देखा गया है कि प्रॉपर्टी डीलर आपको विवादित प्लॉट बेच देते हैं, ऐसे में आपका समय और पैसा दोनों खराब होते हैं। इसलिए काफी सोच विचार कर ही मकान अथवा भूखंड लेना चाहिए। 

कोशिश करें कि प्राधिकरण अथवा आवास विकास का प्लॉट खरीदें : दोस्तों जिला विकास प्राधिकरण के भूखंड को खरीदना ज्यादा अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें धोखाधड़ी की गुंजाइश न के बराबर होती है। इसके आलावा इसके भूखंड पर बिजली, पानी, रोड, सीवर, मार्केट, स्कूल आदि जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मिलती है। इसके अलावा प्राधिकरण समय समय पर जरूरत पर अपने क्षेत्र में विकास कार्य करता रहता है। प्राधिकरण से सस्ता मकान या भूखंड लेने के लिए योजनाएं आती रहती हैं, इस पर नजर बनाकर रखें, ताकि आप सीाधे प्राधिकरण से प्रॉपर्टी खरीद सकें। यहां पर आपको प्रॉपर्टी नीलामी और लॉटरी के माध्यम से मिलती है। हालांकि यहां की प्रॉपर्टी को ब्लैक में भी खरीदा जा सकता है। इसमें आपको इसकी रीसेल की प्रॉपर्टी मिल सकती है। 


आवास विकास से प्रॉपर्टी लेना फायदे का सौदा : आवास विकास परिषद का गठन ही शहर में लोगों के लिए आवास की व्यवस्था करना है। यह समय समय पर आवासीय याोजनाएं लाता रहता है। इसके लिए जरूरमंद को परिषद की वेबसाइट पर विजिट करते रहना चाहिए। यहां से आपको किश्तों में प्रॉपर्टी मिल सकती है, क्योंकि प्राधिकरण और आवास विकास की प्रॉपर्टी पर आसानी से लोन मिल जाता है। 

आवास विकास परिषद की प्रॉपर्टी में आपको बिजली, सड़क, सीवर, पानी, मार्केट, पार्क, स्कूल जैसी सभी व्यवस्थाएं मिलती है। यहां पर भी धोखााधड़ी की संभावना न के बराबर है। 

सोसाइटी में प्लॉट खरीदने से पहले पड़ताल करें : अगर आपका बजट कम है और आप शहर के बाहरी इलाकों में प्राइवेट बिल्डर द्वारा बेचे जा रहे प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको काफी सजग रहने की जरूरत है। यहां पर धोखाधड़ी की संभावनाएं 76 प्रतिशत तक हैं। इसलिए ऐसी जमीन को खरीदते समय खास ध्यान पड़ेगा। अगर आप इस झंझट से बचना चाहते हैं तो कोशिश करें कि उक्त भूखंड पर किसी बैंक से लोन ले लें। बैंक आपको पीएलसी पर लोन देगा, इससे पहले वो जमीन की पड़ताल खुद करेगा। ऐसे में आपका सिरदर्द कम हो जाता है। लेकिन इसके लिए बैंक आप से करीब 5000 रुपये फाइल शुल्क के नाम पर पहले ही जमा करवा लेगा। हालांकि ये शुल्क तीन महीने तक मान्य होगा। यानी आप तीन महीने में अगर कोई दूसरा प्लॉट देखते हैं तो बैंक नि:शुल्क लोन प्रक्रिया शुरू करेगा।