शनिवार, 25 जनवरी 2020

अब 29 प्रजाति के पेड़ों की कटान प्रतिबंधित


अब 29 तरह के पेड़ों को काटने से पहले अनुमति लेना जरूरी

29 प्रजाति के पेड़ों की कटान प्रतिबंधित होगी। इन पेड़ों को काटने से पहले विभाग से अनुमति लेना जरूरी होगा। साथ ही अनुमति की शर्तों में भी व्यापक बदलाव किया गया है। डीएफओ एनके सिंह ने यह जानकारी शनिवार को दी।

 उन्होंने बताया कि अब तक सिर्फ पेड़ों की छह प्रजाति (आम, महुआ,  खैर, शीशम, नीम व सागौन) ही प्रतिबंधित थी। जबकि अब शासन ने सात जनवरी को शासनादेश के जरिए साल, बीजासाल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंची, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ को प्रतिबंधित दायरे में शामिल कर दिया है। इन पेड़ों को बिना अनुमति काटने पर वन अधिनियम की धारा 4/10 के तहत सजा व जुर्माना हो सकता है।

अनुमति के नियम भी हुए कड़े
डीएफओ ने बताया कि पहले विभाग से अनुमति के समय एक पेड़ काटने पर दो पेड़ों को लगाने की शपथ अथवा खर्च देना होता था। अब एक पेड़ काटने की अनुमति के समय 10 पेड़ों को रोपने व देखरेख के लिए धनराशि जमा करनी होगी। पेड़ को काटने की अनुमति के समय वन अधिकारी को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि संबंधित पेड़ का व्यास पूरा हो चुका है अथवा उसकी बढ़त अभी संभव है। उपयुक्त व्यास न होने पर वन अधिकारी भी पेड़ को काटने की अनुमति नहीं दे सकेंगे।

45 लाख पौधे रोपित होंगे
डीएफओ ने बताया कि शासन ने अगले तीन वर्ष में रोपित किए जाने वाले पौधों की संख्या तय कर नर्सरी तैयार करने के आदेश दिए हैं। इस वर्ष एक जुलाई से पौधरोपण का अभियान चलाया जाएगा। जिले में 45 लाख 79 हजार 367 पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया है।

Republic Day 2020: गणतंत्र दिवस पर ब्राजील के राष्ट्रपति होंगे मुख्य अतिथि जेयर बोलसोनारो


गणतंत्र दिवस पर ब्राजील के राष्ट्रपति होंगे मुख्य अतिथि जेयर बोलसोनारो


इस बार 26 जनवरी (26 January) को भारत के मुख्य अतिथि ब्राजील (Brazil) के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो (Jair Bolsonaro) होंगे। इस बार देश 71वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) मना रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान निमंत्रण दिया था। वहीं पिछले साल गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा थे।  जेयर बोलसोनारो को 2018 में ब्राजील का राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था और उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1988 में की थी. 

हर साल की तरह इस बार भी हम अपना गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाने के लिए तैयार हैं। इस साल हम अपना 71वां गणतंत्र दिवस सेलिब्रेट करने जा रहे हैं। इस खास दिन के लिए देश की राजधानी दिल्ली समेत देश के कोने-कोने में तैयारियां जोरो-शोरो पर हैं। स्कूल-कॉलेजों में इस दिन आयोजित होने वाले प्रोगाम के लिए स्टूडेंट्स तैयारियों में जुटे हैं। इन सबके बीच में आपके मन ये सवाल आता होगा कि आखिर 26 जनवरी को ही हम ‘रिपब्लिक डे  (Republic Day 2020) क्यों मनाया जाता है।  तो आइये जानते हैं। दरअसल भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 में भारत के संविधान को स्वीकार किया था, जबकि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूरे देश में लागू हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि 26 जनवरी 1929 को अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ का नारा दिया था। इसके बाद से ही इस दिन को चुना गया था।

दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान
भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन हुआ था। संविधान सभा ने अपना काम 9 दिसंबर 1946 से शुरू किया। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान 2 साल, 11 माह, 18 दिन में तैयार हुआ। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान सौंपा गया, इसलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है।   इसमें 448 आर्टिकल और 12 अनुसूचियां हैं। अब तक इसमें 100 अमेंडमेंट किए जा चुके हैं। भारत के संविधान को हिंदी और इंग्लिश में हाथ से लिखा गया था। इसकी ओरिजिनल कॉपी पार्लियामेंट की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखी हुई है।

जानें कुछ अन्य अहम तथ्य
- 26 जनवरी 1950 में इस दिन ही भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था।
- 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.18 बजे भारत एक गणतंत्र बना। इस के छह मिनट बाद 10.24 बजे राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।
-  इस दिन पहली बार बतौर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से निकले थे। इस दिन पहली बार उन्होंने भारतीय सैन्य बल की सलामी ली थी। पहली बार उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था।

बुधवार, 15 जनवरी 2020

प्रॉपर्टी खरीदते समय इन 9 बातों का रखें विशेष ध्यान



प्रॉपर्टी खरीदते समय इन 9 बातों का रखें विशेष ध्यान

nbtshekhar@gmail.com


1. जल्दबाजी कतई न करें।

2. जब कभी जमीन अथवा किसी भी तरह की प्रॉपर्टी देखने जाएं तो पहले अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखें।इसके बाद ब्रोकर द्वारा दिखाई गई साइट को कम से कम तीन बार अकेले और परिवार के साथ उसे देखने जाएं। कोशिश करें कि हर बार समय भी अलग हो। मसलन अगर पहली बार सुबह गए थे तो अब दोपहर में जाए और उसके बाद जाएं तो शाम और फिर एक बार रात में भी चक्कर मारकर देखे। क्योंकि जहां भी आप प्रॉपर्टी लेने जा रहे हैं वहां आपको पूरे दिन और रात बिताने हैं, ऐसे में वहां के हर समय का जायजा मिल जाएगा। मसलन सुबह शाम और रात में कुछ अंतर दिखेंगे जो आपको एक ही टाइम में जाने से छिपाए अथवा न दिखने वाले हो सकते हैं।

3. इसके अलावा जिस जगह भी प्रॉपर्टी ले रहे हैं वहां के पड़ोसियों से भी इलाके के बारे में जानकारी करें। उन्हें बताएं कि वो आपके मोहल्ले में जमीन अथवा फ्लैट ले रहे हैं। ताकि अगर कोई भी समस्या हो तो वो आपके सामने आ जाए। हो सकता है कि आपको कुछ लोग ऐसे भी मिल जाए जो सिर्फ आपको निगेटिव ही बताएं, लेकिन उससे घबराए नहीं। क्योंकि उनके बताने के बाद आप अपना निर्णय स्वयं लेने वाले हैं। हां एक फायदा जरूर होगा कि आप उनकी बताई बातों को भी जज कर पाएंगे। 4. जब आप दिखाई गई प्रॉपर्टी से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं तो फिर बेचने वाले से उसके पेपर मांगे और पूछे कि इस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कौन करेगा। क्योंकि ज्यादातर बिल्डर कॉन्ट्रैक्ट अथवा एग्रीमेंट पर ही सेल करते हैं, ऐसे में आपको जमीन के असली मालिक का पता होना चाहिए। एग्रीमेंट पर बिल्डर जमीन मालिक से पावर ऑफ अटार्नी लेकर उसका आधा मालिक ही बनता है। इस दौरान आप उससे रेट को लेकर भी बात करें, और बागर्निंग भी करें। मानें तो ठीक नहीं तो कोई बात भी नहीं। प्रॉपर्टी खरीदते समय बार्गनिंग को बहुत ज्यादा तवज्जों नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि अगर प्रॉपर्टी आपके मतलब की है तो उसके दाम कम मायने रखते हैं।

5. पेपर चेक करने से पहले जमीन के आसपास का मुआयना अच्छे से कर लें, सुनिशचित करें कि उस जमीन का वाटर लेवल कितना है, पानी कैसा आता है। आसपास कितनी और कैसी कर्मशल एक्टिविटी होती है। कोई फैक्ट्री वैगरह है कि नहीं आदि

6. जमीन के पेपर दो तरह के होते हैं, एक जमीन रीसेल होती है और दूसरी किसान द्वारा बेची गई। अगर जमीन रीसेल है तो उसमें बैंक लोन करेगा। हालांकि यह लोन जमीन खरीदने के लिए नहीं होगा बल्कि खरीदने और बनवाने का एक साथ होगा। इससे ही पीएलसी कहा जाता है। जबकि किसान वाली जमीन खरीदने में बैंक लोन नहीं करेगा। क्योंकि किसान से खरीदी गई जमीन में आपको पेपर के नाम पर खतौनी और दाखिल खारिज का कागज ही मिलेंगे।रीसेल की जमीन में आपको पेपर के नाम पर रजिस्ट्री मिलेगी। रजिस्ट्री पेपर लेते समय ध्यान रखें कि रजिस्ट्री का अंतिम प़ृष्ठ पेपर में हो जरूर देख लें। इस पेपर में दो मुहर होंगी और जिल्द संख्या लिखी होगी। इसलिए पेपर लेते समय अंतिम और पहला पेपर जरूर देख लें। पहले पेपर में खरीददार और विक्रेता की फोटो और रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी की भी फोटो भी होगी। हालांकि कई बार अधिकारी की फोटो नहीं भी होती है।

जबकि खतौनी में किसान आपको एक नंबर देगा जिससे आप इंटरनेट में भू-लेख पोर्टल पर जाकर चेक कर सकते हैं। इस पोर्टल पर जाने से पहले आपके पास जमीन जिस गांव में है उसका नाम और संबंधित तहसील का पता होना जरूरी है। इसके बाद ही आप भू-लेख पोर्टल से संबंधित जमीन का रेकॉर्ड देख सकते हैं। हालांकि यह डेटा अप्रमाणित होगा।

7. दो तरह के मामलों में आपको संबंधित तहसील जाना होगा। वहां एक वकील करना होगा। इस वकील से आप रजिस्ट्री की दूसरी नकल निकलवा सकते हैं। इसके लिए आपको वकील को नकल फीस और वकील की फीस देनी होगी। अगर आपके के पास खतौनी है तो आप वकील के माध्यम से तहसील से उक्त खतौनी का 60 साल का रेकॉर्ड मांग लें। यह रेकॉर्ड प्रामणित होगा। इससे आपको पता चल जाएगा कि उक्त जमीन पर पूरी तरह से कौन मालिक है। जमीन ग्राम समाज की है कि नहीं इसकी भी पुष्टि हो जाएगी। एक बार सबकुछ क्लीयर हो जाए तो आप डील फाइनल कर सकते हैं। 8. डील फाइनल करने से पहले संबंधित प्लॉट अथवा प्रॉपर्टी का चिह्नांकन भी करवा लें। इसके लिए आप संबंधित लेखपाल की मदद लें। लेखपाल अथवा अमीन के माध्यम से जमीन की पैमाइश करवा लें। उस पर निशानदेही भी कर दें। तदोंपरांत आप जमीन का बयाना कर दें। बाकी रकम रजिस्ट्री के दौरान ही देनी होती है।

9. रजिस्ट्री करवाने के तुरंत बाद ही संबंधित प्रॉपर्टी पर अपनी बाउंड्रीवॉल खिंचवा दें। भूमि पूजन के बाद बाउंड्री बनाने से आपकी जमीन आपके कब्जे में आ जाएगी।





























शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

माघ मेला 2020 : 10 जनवरी से अंतिम दिन 21 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक


माघ मेला 2020 : 10 जनवरी से अंतिम दिन 21 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक


गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम की नगरी प्रयागराज में माघ मेला-2020 का श्रीगणेश पौष पूर्णिमा पर 10 जनवरी से होगा। जप, तप, स्नान, ध्यान और दान के कल्पवास की भी इसी दिन से शुरुआत हो जाएगी। यह मेला महाशिवरात्रि यानि 21 फरवरी तक चलेगा। मेला प्रशासन ने प्रथम स्नान पर्व पर 32 से 40 लाख तक श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान लगाया है, जो मौनी अमावस्या के दिन करीब दो करोड़ तक पहुंचेगा। इस बार मेला क्षेत्र में भीख मांगने की इजाजत नहीं होगी। भिछुकों को हटाने के लिए भिक्षुक निरोधक दस्ते का गठन किया गया है। प्रशासन को अंदेशा है कि भिखारियों के भेष में अराजकतत्व मेले में आ सकते हैं। 


इस बार क्या है खास 

पहली बार भिखारियों पर होगी पाबंदी 
भिक्षुक निरोधक दस्ते का गठन 

सरकार ने 57 करोड़ रुपए का जारी किया बजट

योगी सरकार ने माघ मेले के लिए 57,90,61,000 रुपए का बजट जारी किया है। कुंभ की सफलता के बाद प्रशासन को उम्मीद है कि, इस बार माघ मेले में ज्यादा श्रद्धालु आएंगे। इसलिए मेले का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में 500 बीघा बढ़ाकर ढाई हजार क्षेत्रफल कर दिया गया है। डायल 112 डायल की 20 चार पहिया और 25 दोपहिया वाहनों को लगाया गया है। 174 सीसीटीवी कैमरों में पूरे मेले को कवर करने की कोशिश की गई है। ड्रोन कैमरे से भी मेले पर नजर रखी जाएगी। कुंभ मेले में पिछले वर्ष मात्र 12 थाने और 36 पुलिस चौकियां बनाई गई थी। जबकि इस बार 13 थाने और 29 पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। 


5 किमी लम्बा होगा स्नान घाट

माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की तादात को देखते हुए इस बार मेला क्षेत्र में तकरीबन 5 किलोमीटर लंबा स्नान घाट बनाया गया है। गंगा और यमुना किनारे कुल 16 स्नान घाट बनाए गए हैं। सबसे बड़ा संगम स्नान घाट है। सर्कुलेटिंग एरिया में 3 किलोमीटर के स्नान घाट की तैयारी चल रही है। यहां 1 मिनट में 13 से 15000 श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे। महिलाओं के लिए 700 चेंजिंग रूम बन रहे हैं। 50 हाई मास्ट रोशनी के लिए लगाए गए हैं। रात में सभी स्नान घाट दूधिया रोशनी से जगमग दिखाई देंगे।

छह सेक्टरों में बसाया गया मेला

वर्ष 2018 के मेले में 5 सेक्टर थे, जबकि इस बार 6 सेक्टर में मेला बसाया जा रहा है। सेक्टर 1 क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा होगा। इसमें संगम परेड मैदान शामिल है। सेक्टर एक में ही सरकारी विभागों के कार्यालय कंट्रोल रूम, पुलिस लाइन, मीना बाजार व झूले लगाए गए हैं। सेक्टर एक को छोड़कर सभी सेक्टरों में कल्प वासियों को बसाया जा रहा है। सेक्टर 2 काली मार्ग से नागवासुकि तक होगा, जबकि सेक्टर 3, 4 और 5 झूसी क्षेत्र में है। सेक्टर 6 अरैल क्षेत्र में है। खाक चौक, दंडी बाड़ा और आचार्य बाड़ा भी झूसी क्षेत्र में ही हैं। 

225 मेला स्पेशल ट्रेनों का होगा संचालन

माघ मेले के दौरान रेलवे ने तीन प्रमुख स्नान पर्वो मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी पर कुल 225 मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन की योजना बनाई है। अन्य तीन पर्वों पौष पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुसार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।

प्रमुख स्नान

तारीख प्रमुख स्नान श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान
10 जनवरी पौष पूर्णिमा 32 लाख
15 जनवरी मकर संक्रांति 80 लाख
24 जनवरी मौनी अमावस्या 225 लाख
30 जनवरी   बसंत पंचमी 75 लाख
09 फरवरी माघी पूर्णिमा 75 लाख
21 फरवरी महाशिवरात्रि 15 लाख